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HRA कैलकुलेटर

मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए HRA टैक्स छूट कैलकुलेट करें।

Metro cities: Delhi, Mumbai, Chennai, Kolkata (50% rule). All others are Non-Metro (40% rule).

HRA कैलकुलेटर क्या है?

HRA कैलकुलेटर आपके House Rent Allowance पर मिलने वाली टैक्स छूट कैलकुलेट करता है। बेसिक सैलरी, मिला HRA, चुकाया गया किराया और शहर का प्रकार दर्ज करें — यह तुरंत आपकी छूट योग्य HRA राशि और टैक्सेबल HRA दिखा देगा।

HRA कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें

  1. बेसिक सैलरी (या बेसिक + DA) मासिक/वार्षिक डालें।
  2. कंपनी से मिला HRA डालें।
  3. चुकाया गया वास्तविक किराया डालें।
  4. शहर चुनें — मेट्रो (50%) या नॉन-मेट्रो (40%)।
  5. तुरंत छूट और टैक्सेबल HRA देखें।

HRA छूट के तीन हिस्से (कम वाला लागू)

  • वास्तविक HRA प्राप्त राशि
  • बेसिक सैलरी का 50% (मेट्रो) / 40% (नॉन-मेट्रो)
  • किराया - बेसिक का 10%

HRA पर ध्यान देने योग्य बातें

HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। ₹1 लाख/वर्ष से ज्यादा किराया देने पर मकान मालिक का PAN ज़रूरी है। माता-पिता को किराया देकर भी HRA क्लेम किया जा सकता है, बशर्ते वे इसे अपनी आय में दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HRA छूट कैसे कैलकुलेट होती है?
HRA छूट तीन में से सबसे कम राशि के बराबर होती है: (1) वास्तविक HRA प्राप्त; (2) मेट्रो शहरों में बेसिक सैलरी का 50% (नॉन-मेट्रो में 40%); (3) चुकाया गया किराया - बेसिक सैलरी का 10%। बाकी HRA पर टैक्स लगता है।
कौन से शहर मेट्रो माने जाते हैं?
HRA के लिए केवल चार शहर मेट्रो हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई। बंगलुरु, हैदराबाद, पुणे जैसे बड़े शहर भी नॉन-मेट्रो के अंतर्गत आते हैं और 40% की दर पाते हैं।
क्या मैं माता-पिता को किराया देकर HRA क्लेम कर सकता हूँ?
हाँ, अगर आप अपने माता-पिता के घर में रहते हैं और उन्हें वास्तविक किराया देते हैं। उन्हें इसे अपनी आय में दिखाना होगा और टैक्स देना होगा। बैंक ट्रांसफर, रेंट एग्रीमेंट और रसीद रखें — IT डिपार्टमेंट जांच कर सकता है।
₹1 लाख से ज्यादा किराए पर क्या ज़रूरी है?
अगर वार्षिक किराया ₹1 लाख से ज्यादा है (मासिक ₹8,333+), तो मकान मालिक का PAN नंबर ज़रूरी है। PAN न होने पर मकान मालिक से डिक्लरेशन (Form 60) लेना होता है।
क्या नई टैक्स व्यवस्था में HRA छूट मिलती है?
नहीं। HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। नई व्यवस्था में चुनने पर HRA, 80C, 80D जैसी अधिकांश कटौतियाँ नहीं मिलतीं।

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